
SARANGARH BILAIGARH:- जिले को कुपोषण मुक्त बनाने के लक्ष्य के साथ कलेक्टर पद्मिनी भोई साहू ने महिला एवं बाल विकास तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग को विशेष जिम्मेदारी सौंपी है। जिले के 175 कुपोषित बच्चों की नियमित निगरानी, स्वास्थ्य परीक्षण, गृह भ्रमण और पोषण परामर्श के लिए अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई है, ताकि बच्चों को जल्द सामान्य श्रेणी में लाया जा सके।
प्रशासन के अनुसार जिले के 175 आंगनबाड़ी केंद्रों में एक-एक कुपोषित बच्चे चिन्हित किए गए हैं। संबंधित अधिकारी आवंटित केंद्रों का नियमित निरीक्षण करेंगे, बच्चों की पोषण स्थिति की समीक्षा करेंगे और अपनी रिपोर्ट सीधे कलेक्टर को सौंपेंगे।
जिले में अब तक 72 आंगनबाड़ी केंद्र कुपोषण मुक्त घोषित किए जा चुके हैं। इनमें बरमकेला, भटगांव, बिलाईगढ़, कोसीर, लेंधरा और सारंगढ़ परियोजनाओं के विभिन्न गांव एवं वार्ड शामिल हैं। प्रशासन का लक्ष्य इन केंद्रों की संख्या लगातार बढ़ाना है।

इधर, जिला चिकित्सालय सारंगढ़ स्थित सुपोषण केंद्र (एनआरसी) भी कुपोषण से लड़ाई में प्रभावी साबित हो रहा है। पिछले दो वर्षों में यहां 465 कुपोषित बच्चों को उपचार, सुपोषण आहार और आवश्यक दवाएं उपलब्ध कराई गईं, जिसके बाद वे सामान्य श्रेणी में आ गए। भर्ती अवधि के दौरान बच्चों के साथ रहने वाली माताओं को राज्य शासन की ओर से आर्थिक सहायता भी प्रदान की गई।
आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024 में एनआरसी में भर्ती 177 बच्चों में 80.52 प्रतिशत, वर्ष 2025 में भर्ती 170 बच्चों में 82.81 प्रतिशत तथा जनवरी से जून 2026 के बीच भर्ती 118 बच्चों में 95.3 प्रतिशत बच्चे सामान्य श्रेणी में लौट चुके हैं।
कलेक्टर ने संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं कि कुपोषण की रोकथाम के लिए नियमित मॉनिटरिंग, पोषण परामर्श और प्रभावी फॉलोअप सुनिश्चित किया जाए, ताकि सारंगढ़-बिलाईगढ़ को शीघ्र कुपोषण मुक्त जिला बनाया जा सके।

