
17 नवंबर को प्रस्तावित जनसुनवाई को लेकर अब हालात पूरी तरह गर्मा चुके हैं। लालाधुरवा,सरसरा,धौराभाठा,जोगनी और कपिसदा के ग्रामीणों ने सड़क पर मोर्चा संभाल लिया है और साफ चेतावनी दी है कि वे अपनी जमीन किसी भी कीमत पर नहीं देंगे।
ग्रामीणों का विरोध इतना तीव्र हो चुका है कि वे रातभर सड़क पर सोने तक को तैयार हैं,लेकिन जनसुनवाई नहीं होने देंगे। गांवों से आए पुरुषों, महिलाओं और बुजुर्गों ने सड़क पर ही डेरा डाल दिया है, टेंट और आयोजन सामग्री लेकर जा रही गाड़ियों को रोक दिया गया है, जिससे पूरा मार्ग अवरुद्ध हो गया है।

ग्रामीणों का आरोप है कि उनकी सहमति के बिना जबरन जनसुनवाई कर प्रशासन जमीन अधिग्रहण का रास्ता साफ करना चाहता है। उन्होंने कहा कि कई बार आपत्ति दर्ज कराने के बावजूद उनकी समस्याओं पर कोई सुनवाई नहीं की गई।
“जमीन हमारी माँ है इसे किसी कीमत पर नहीं छोड़ेंगे।”इसी भावना के साथ ग्रामीण ठंड और रात के अंधेरे में भी सड़क पर डटे रहने की तैयारी कर चुके हैं।
ग्रामीणों ने प्रशासन को खुला संदेश दिया है“अगर जरूरत पड़ी तो पूरी रात यहीं सड़क पर रहेंगे,लेकिन अपनी जमीन नहीं सौंपेंगे,और न ही जनसुनवाई होने देंगे। यह लड़ाई आखिरी सांस तक चलेगी।”

मौके पर तनाव की स्थिति बनी हुई है। पुलिस तैनात है,लेकिन ग्रामीणों की संख्या और उनका आक्रोश दोनों लगातार बढ़ते जा रहे हैं। महिलाएँ भी बड़ी संख्या में विरोध में शामिल होकर प्रशासन को चुनौती दे रही हैं।
स्थानीय जानकारों का कहना है कि यह विवाद अब सिर्फ विरोध नहीं, बल्कि ग्रामीणों का अस्तित्व बचाने की लड़ाई बन गया है। हालात ऐसे हैं कि 17 नवंबर की जनसुनवाई पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा हो गया है और प्रशासन के लिए स्थिति नियंत्रण में लाना बेहद कठिन दिख रहा है।

