झिलगीटार गांव में वन्यजीव संरक्षण की मिसाल, शिकार मामले में आरोपियों को सौंपेंगे ग्रामीण…!

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सारंगढ़ । सारंगढ़ वन परिक्षेत्र के 943 पीएफ जंगल में सामने आए सांभर शिकार मामले के बाद झिलगीटार गांव के ग्रामीणों ने वन्यजीव संरक्षण को लेकर सराहनीय पहल की है। गांव में आयोजित बैठक में ग्रामीणों ने स्पष्ट निर्णय लिया कि बेजुबान जानवरों का शिकार करने वालों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा और मामले में शामिल लोगों को स्वयं वन विभाग के सुपुर्द किया जाएगा।

दरअसल, पिछले कुछ दिनों पहले सारंगढ़ के जंगल में एक सांभर के शिकार की घटना सामने आई थी। मामले की जानकारी मिलते ही वन विभाग की टीम लगातार आरोपियों की तलाश में जुटी हुई है और साक्ष्य एकत्र किए जा रहे हैं। जैसे ही इस घटना की जानकारी झिलगीटार गांव के ग्रामीणों को मिली, उन्होंने इसकी कड़ी निंदा करते हुए वन विभाग के साथ मिलकर कार्रवाई में सहयोग करने का निर्णय लिया।

इस संबंध में गांव में ग्रामीणों, वन विभाग और मीडिया की मौजूदगी में बैठक आयोजित की गई। बैठक में तय किया गया कि यदि गांव के कोई लोग इस घटना में शामिल पाए जाते हैं तो उनके परिजनों के माध्यम से उन्हें बुलाकर स्वयं ग्रामीण वन विभाग के हवाले करेंगे। साथ ही गांव में मुनादी कर यह संदेश भी दिया जाएगा कि जंगल और वन्यजीवों को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ सामाजिक और कानूनी दोनों स्तर पर कार्रवाई की जाएगी।

इधर आरोपियों के परिजनों का कहना है कि सांभर का शिकार जानबूझकर नहीं किया गया। उनका दावा है कि कुछ ग्रामीण महुआ बीनने जंगल गए थे, उसी दौरान कुत्तों ने सांभर पर हमला कर दिया था। लालच में आकर कुछ लोग उसका थोड़ा मांस ले आए और बाकी वहीं छोड़ दिया। फिलहाल वन विभाग पूरे मामले की जांच कर रहा है।

गांव के जिला पंचायत सदस्य एवं सभापति डॉ. हरिहर जायसवाल ने कहा कि इस घटना से झिलगीटार गांव की छवि धूमिल हो रही है, इसलिए सभी ग्रामीणों ने एकजुट होकर फैसला लिया है कि जो भी इस मामले में शामिल होगा, उसे ग्रामीण स्वयं वन विभाग को सौंपेंगे। साथ ही गांव में जागरूकता फैलाकर जंगल और वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी।

वहीं डिप्टी रेंजर मिलन भगत (चाटीपाली वन विभाग) ने बताया कि सांभर शिकार की घटना की जांच जारी है और टीम लगातार दबिश दे रही है। उन्होंने कहा कि झिलगीटार के ग्रामीणों द्वारा आरोपियों को समर्पण कराने की पहल बेहद सराहनीय है। ग्रामीणों और वन विभाग के इस समन्वय से जंगल और वन्यजीवों की सुरक्षा को मजबूत करने में मदद मिलेगी।

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