सारंगढ़ वन विभाग बना भ्रस्टाचार का गढ़…!

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Cpw तोड़कर वन भूमि को अधिग्रहण करने वाले को खुली छूट ,,वन विभाग का जांच सन्देहास्पद !

सारँगढ – सारंगढ़ वन विभाग की काली करतूत उजागर खबर का बड़ा असर 6 महीने बाद आधे एकड़ से अधिक जमीन निकला वन विभाग और शासकीय ,मामले को दबाने वन विभाग ने खेला शतरंज का खेल लेकिन सत्य को मात नहीं दे पाई वन विभाग और फंस गई अपने ही जाल में और 6 महीने बाद पुनः जांच में आया वन विभाग की अधिकारियों का असली चेहरा दरअसल मामला 6 महीने पीछे का है ग्राम हट्टापाली में किसान योगेश पटेल ने मदन नायक की जेसीबी और ट्रैक्टर से अपनी निजी भूमि के साथ वन विभाग और शासकीय भूमि पर अतिक्रमण कर रहे थे जिस पर वन विभाग ने पहले दबिश देकर जेसीबी ट्रैक्टर जप्त कर लगभग 3 महीने तक रखा और फिर उसे मुआवजा लेकर गाड़ी छोड़ दिया गया था मामला धीरे से मिडिया तक आई खबर चला फिर से आज जांच हुआ तो वन विभाग की 11 डिसमिल भूमि ,और 42 डिसमिल शासकीय ऑरेंज एरिया जांच में अतरिक्त पाया गया

जांच की सत्यता को मीडिया से आखिर क्यों छुपाया गया !

आपको बता दें इस संबंध में एसडीओ अमिता गुप्ता ने पहले जानकारी दिया गया था उसमें उन्होंने कहा कि वन विभाग जरूर पकड़ा था लेकिन राजस्व एरिया होने की वजह से राजस्व विभाग मामले को भेज दिया गया था लेकिन आज जांच में वन विभाग का 11 डिसमिल जमीन निकला और इतना ही नहीं शासकीय ऑरेंज एरिया 42 डिसमिल भूमि निकला और पहले एसडीओ अमिता गुप्ता मीडिया को अपनी बयान में कहा कि कोई मोनारा नहीं तोड़ा गया और कोई cpw नहीं तोड़ा गया लेकीन आज जांच हुआ तो cpw 8 मीटर तक तोड़कर खेत बनाया गया अब सवाल यही है कि cpw तोड़ा गया लेकिन एसडीओ कहते कोई cpw नहीं टूटा आखिर क्यों छुपाया गया !

एसडीओ वन विभाग का जज होता है जिनकी कंधों पर जंगल को बचाने और जो जंगल को नुकसान पहुंचाता हैं उसे कड़ी सजा देने का काम करता है ताकि कोई जंगल से खिलवाड़ न करे लेकिन यहां तो एसडीओ ही मामले को दबाया और सीधा रफ़दफा कर दिया गया अगर किसी विभाग का जज ऐसा करतूत करने लगे तो उस विभाग का क्या होगा यह सबसे बड़ा सावल है इतना ही नहीं मामला 6 महीने पीछे का है लेकिन न तो वन विभाग ने अपनी 11 डिसमिल जमीन को सुरक्षित किया और ना ही 42 डिसमिल भूमि ऑरेंज एरिया को न तो वन विभाग ने और ना ही राजस्व विभाग ने सुरक्षित किया बल्कि कार्यवाही के नाम पर लीपा पोती कर गाड़ी छोड़ा दिया गया और कब्जाधारी योगेश पटेल को जमीन मानो दान में दे दिया जहां आज की जांच करने पर उसमें खेती करना पाया गया अगर मामला उजागर नहीं होता तो आज भी 53 डिस्मिल वन विभाग और शासकीय ऑरेंज एरिया की जमीन कब्जाधारी के पास ही रहता सूत्र बता रहे इस मामले में मोटा चढ़ावा चढ़ाया गया था अधिकारी को जिसकी वजह से गाड़ी छोड़ा और जमीन कब्जाधारी को दे दिया गया इतना ही नहीं 35 पेड़ भी काटे गए लेकिन आज तक 6 महीना बीत गया न तो लकड़ी डिपो पहुंचा

फिलहाल अब देखना होगा दुबारा जांच हुआ है अब वन विभाग क्या कुछ कार्यवाही करती है ये भी देखने वाली बात है क्या इस बार भी मामला को ठंडा बस्ते में डाला जाएगा या फिर होगा कड़ी कार्यवाही।

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