
गजब है साहब! एक हफ्ते में ट्रांसफर और फिर वापसी – ये है डॉक्टर सिदार का कमाल!
सारंगढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में कार्यरत डॉ. आर. एल. सिदार का एक सप्ताह पहले ही पत्थलगांव ट्रांसफर हुआ था। आदेश भी बाकायदा जारी हुआ। लेकिन अब नया आदेश आया है – डॉ. सिदार फिर से वहीं, यानी सारंगढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में वापस! जैसे कुछ हुआ ही न हो।बात इतनी सीधी नहीं है जितनी दिखती है। जानकारों की मानें तो डॉ. सिदार पिछले लगभग 25 वर्षों से एक ही जगह जमे हुए हैं। नियम क्या कहते हैं? सरकारी सेवा में लगातार एक स्थान पर इतनी लंबी अवधि तक टिके रहना नियमों के खिलाफ है। लेकिन नियम सिर्फ आम डॉक्टरों के लिए होते हैं शायद… डॉ. सिदार जैसे “विशेषाधिकार प्राप्त” लोगों पर लागू नहीं होते।इतना ही नहीं, डॉ. साहब का अपना निजी अस्पताल भी सारंगढ़ में है। यानी सरकारी सेवा भी यहीं, निजी कमाई भी यहीं – फिर छोड़ें क्यों?सबसे बड़ा सवाल यही है कि एक हफ्ते में ट्रांसफर का आदेश कैसे पलट गया?क्या किसी “ऊपर” के इशारे पर हुआ यह आदेश वापसी?या फिर खुद ही व्यवस्था इतनी लाचार है कि नियमों को धत्ता बताकर कोई भी डॉक्टर सिस्टम को अंगूठा दिखा सकता है।
सारंगढ़ की जनता अब सवाल पूछ रही है –
सरकार की तबादला नीति पर क्या वाकई भरोसा किया जा सकता है?
क्या एक डॉक्टर 25 साल तक एक ही अस्पताल में टिक सकता है – बिना कोई रसूख या सेटिंग के?
क्या यह सेवा है या सत्ता की साझेदारी?
इस तरह के मामले न केवल स्वास्थ्य सेवाओं की साख को कमजोर करते हैं, बल्कि ईमानदारी से काम करने वाले अधिकारियों और डॉक्टरों के मनोबल को भी गिराते हैं।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस पर चुप्पी साधे रखता है या जनता की आवाज़ को गंभीरता से लेकर जवाबदेही तय करता है।

