
सारंगढ़-बिलाईगढ़, 19 अगस्त 2025।
कलेक्टर डॉ. संजय कन्नौजे ने आज कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित समय-सीमा की बैठक में विभागीय कार्यों की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने डिजिटल फसल सर्वेक्षण को राज्य सरकार की महत्वपूर्ण पहल बताते हुए कहा कि यह कार्य सीधे किसानों से जुड़ा हुआ है, इसलिए इसे पूरी गंभीरता और पारदर्शिता के साथ किया जाना चाहिए।
कलेक्टर ने कहा कि खेत, टिकरा आदि में वास्तविक रूप से कौन-सी फसल ली जा रही है, धान बोया गया है या धान की जगह अन्य फसल, इसकी सटीक जानकारी दर्ज होनी चाहिए। किसी भी तरह की लापरवाही या गलत जानकारी किसानों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है, क्योंकि इसी सर्वेक्षण के आधार पर धान खरीदी, फसल बीमा और नुकसान की स्थिति में मुआवजा तय किया जाएगा।
उन्होंने तहसीलदारों से सर्वे की प्रगति रिपोर्ट लेते हुए पूछा कि कितने सर्वेयर अच्छे से काम कर रहे हैं और किन्हें प्रशिक्षण की आवश्यकता है। डॉ. कन्नौजे ने सरसींवा क्षेत्र में एक सर्वेयर के उत्कृष्ट कार्य का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे कर्मचारियों का हौसला बढ़ाया जाना चाहिए।
क्या है डिजिटल फसल सर्वेक्षण?
डिजिटल फसल ऐप में खेत की स्थिति, खसरा नंबर और मालिक का नाम स्वतः दर्ज हो जाता है। सर्वेयर को फसल के साथ खेत की तीन फोटो (लॉन्गिट्यूड-लैटिट्यूड सहित) अपलोड करनी होती है। इसके बाद पटवारी अनुमोदन या सुधार के लिए भेजता है। दो बार रिजेक्ट होने पर मामला राजस्व निरीक्षक के पास जाता है। अंततः तहसीलदार और नायब तहसीलदार जांच कर अंतिम स्वीकृति प्रदान करते हैं।
फर्जीवाड़ा रोकने में कारगर
कलेक्टर ने बताया कि यह प्रणाली फर्जी रकबा, फर्जी फसल या फर्जी किसान की प्रविष्टियों पर भी अंकुश लगाएगी। सर्वेक्षण के दौरान भौतिक सत्यापन से धोखाधड़ी करने वालों की पहचान कर उनकी रिपोर्ट विभाग को सौंपी जाती है। इसके बाद ऐसे लोगों को धान खरीदी, मुआवजा और अन्य लाभों से वंचित कर कार्रवाई की जाती है।
डॉ. कन्नौजे ने अधिकारियों और कर्मचारियों से कहा कि किसान हित से जुड़े इस अभियान को पूरी जिम्मेदारी और गंभीरता के साथ सफल बनाएं।

