
सारंगढ़-बिलाईगढ़। जिले में लगभग 500 एकड़ भूमि पर खदान खोलने की तैयारी का ग्रामीणों ने जमकर विरोध शुरू कर दिया है। रायगढ़ पर्यावरण विभाग ने 24 सितंबर को जनसुनवाई का आदेश जारी किया है। लेकिन जनसुनवाई से पहले ही लालाधुरवा, गुडेली, कपिसदा, बंजारी सहित आसपास के ग्राम पंचायतों के सैकड़ों ग्रामीणों और सरपंचों ने कलेक्टर को लिखित आपत्ति पत्र सौंपकर खदान का विरोध दर्ज कराया।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि खदान खुली तो उनकी उपजाऊ भूमि और जीवन दोनों बर्बाद हो जाएंगे। किसानों का आरोप है कि निजी कंपनी मेसर्स ग्रीन सस्टेनेबल मैन्युफैक्चरिंग प्राइवेट लिमिटेड अपने प्रभाव और धनबल का दुरुपयोग करते हुए शासन-प्रशासन पर दबाव बना रही है।
आपत्ति पत्र में ग्रामीणों ने स्पष्ट लिखा है कि—
1. खदान के लिए प्रस्तावित लगभग 200 हेक्टेयर सिंचित कृषि भूमि महानदी और लात नाला से सिंचित होती है, जिसमें धान, मूंगफली, उड़द जैसी फसलें होती हैं। यह किसानों की आजीविका का एकमात्र साधन है।
2. निजी कंपनी के पक्ष में भूमि अधिग्रहण न तो विधिसम्मत है और न ही जनहित में, इसलिए भू-अर्जन की कार्यवाही पूरी तरह अवैधानिक है।
3. पंचायत एवं ग्राम सभा की अनुमति के बिना भूमि अधिग्रहण संभव नहीं है। ग्रामीणों ने ग्रामसभा में खनन कार्य का विरोध करते हुए इसे निरस्त करने का प्रस्ताव भी पारित किया है।
किसानों ने चेतावनी दी है कि किसी भी कीमत पर वे अपनी जमीन नहीं देंगे। यदि शासन-प्रशासन ने उनकी आपत्तियों को नजरअंदाज किया, तो आंदोलन और भी उग्र होगा।
👉 ग्रामीणों की यह आपत्ति अब 24 सितंबर को होने वाली जनसुनवाई से पहले शासन-प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गई है।

